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कैमरा बोलता है... »

[27 Mar 2011 | One Comment | ]
`एक तू ही धनवान है…स्विस…बाकी सब कंगाल’

जयपुर दूरदर्शन केंद्र के केंद्र निदेशक हरीश करमचंदानी ने एक दिलचस्प ई-मेल भेजा है, जिसमें फोटोग्राफ अटैच्ड है। यही फोटो आज के कैमरा बोलता है सेक्शन में। खास बात यह है कि फोटो के नाक-नक्श किसी शिलालेख से कम नहीं हैं। यह छायाचित्र त्रासदी, विडंबना और कटाक्ष का खूबसूरत मेल है : मॉडरेटर
 

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[26 Mar 2011 | Comments Off on …पैरों में बिवाई है | ]
…पैरों में बिवाई है

आप जानते हैं अदम गोंडवी को? अजीम शायर. दुनिया भर के लोग उन्हें जानते-पहचानते-समझते बूझते हैं। मैंने अदम जी को देखा, पहचाना और अभिभूत भी हुआ हूं। वो शायद नहीं जानते होंगे, लेकिन उनके शहर का होने के नाते गौरवान्वित और कुछ ज्यादा ही अकड़ी गर्दन लेकर फिरने का हुनर हम बहुत पहले से रखते हैं।
ख़ैर, जयपुर के रहने वाले मित्र अभिषेक गोस्वामी की कैमरा-कृति मिली, तो एकबारगी अदम जी की ही पंक्तियां याद हो आईं।
अभिषेक मंच पर जादू रचते हैं, कलम से मुग्ध करते हैं और कैमरे से …

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[25 Mar 2011 | One Comment | ]
चिट्ठी नहीं तो क्या…आराम ही बांच लें…

स्नेहा चौहान बेहतरीन पत्रकारों में शुमार हैं, लेकिन कभी-कभी उनकी नज़र कैमरे के ज़रिए भी जगहों, रास्तों, लोगों और अहसास को समझती है। स्नेहा की इसी नज़र की बानगी यहां…
ये जगह है…जबलपुर का सिविक सेंटर। यहीं बना है जोंसगंज का डाकखाना। अब चिट्ठियां लिखने की तो आदत छूट ही गई, सो कुत्तों (मॉडरेट स्वर पसंद करने वाले डॉगी पढ़ें), ने सोचा–आंखें बंद करके आराम ही बांच लें।
प्रवचन बहुत हुआ…अब सीधे चित्र देखिए…

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