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Articles in the संगीत-कला Category

दिल के झरोखे से..., संगीत-कला, साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[8 Feb 2017 | Comments Off on हरिहरन के नए ट्रैक `हौले-हौले’ में साधना की जादुई आवाज़! | ]
हरिहरन के नए ट्रैक `हौले-हौले’ में साधना की जादुई आवाज़!

 
मुंबई डेस्क। 8 फरवरी, 2017। अलमस्त सिंगर-कंपोजर हरिहरन अब अपने नए लव ट्रैक `हौले हौले’ के साथ सामने आए हैं। टी सीरीज ने ये गीत पेश किया है। इसे गायिका साधना जेजुरिकर ने आवाज़ दी है। गीत को निया कुमार और नितीश कपूर पर फिल्माया गया है।

हौले हौले एक `तूफानी’ रोमांटिक गीत है, जो एक रूमानी रिश्ते की रहस्यभरी परतों को धीरे-धीरे खोलता है। अंधेरी में इस म्यूजिक वीडियो को लॉन्च किया गया और यहां मौजूद मीडिया के सामने स्पेशल प्रिव्यू पेश किया गया। लॉन्चिंग इवेंट में म्यूजिक वीडियो की मेकिंग …

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[29 Nov 2014 | Comments Off on मरुभूमि का राग – मांड | ]

– कोषा गुरुंग
झरनों के संगीत और नई फसल की खुशी, अपने आप उगे हुए फूलों की मादक सुगंध, पक्षियों का कलरव, पहाड़ों की चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर, बच्चों की किलकारियां, सरल हृदय युवतियों का प्यार, जातीय पर्व-त्योहार, यही तो है – लोक संगीत, जो हमें मानवीय संवेदनाओं से जोड़ता है और हमें अपने आप से रू-ब-रू कराता है।
अचानक पहाड़ के पीछे से दल के दल बादल निकल आते हैं और धूप की गर्मी खत्म हो जाती है। गांवों के लोग घरों से और खेतों से बाहर चले आते …

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[5 Mar 2013 | Comments Off on RE-POST # कभी तनहाइयों में `मुबारक’ याद आएंगी | ]
RE-POST # कभी तनहाइयों में `मुबारक’ याद आएंगी

मुबारक बेग़म की तबियत बहुत नासाज़ है। एक ज़माने में हज़ारों दिलों को दर्द और सुरों से भर देने वाली मुबारक़ का अब कोई हालचाल भी लेने वाला नहीं। साल भर से भी ज्यादा वक्त हुआ, जब दैनिक भास्कर के ज़रिए मैंने इस खूबसूरत गायिका की तंगहाली की तरफ लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की थी. आज वही आलेख रि-पोस्ट कर रहा हूं। कोई तो मदद करे मुबारक़ की!

– चण्डीदत्त शुक्ल
chandiduttshukla@gmail.com
महबूब के लबों ने चूमीं अंगुलियां। पलकें मीचीं, आंखों से छलके आंसू और थरथराने लगे …

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[20 Jun 2012 | Comments Off on दान सिंह की धुनों से महकी ’गीतांजलि’ | ]
दान सिंह की धुनों से महकी ’गीतांजलि’

आकाशवाणी, मुंबई के मशहूर रेडियो जॉकी यूनुस खान ने बॉलीवुड के विख्यात संगीत निर्देशक दान सिंह के निधन के बाद एक प्रतिष्ठित अखबार में लिखा था, `यदि वरिष्ठ पत्रकार ईशमधु तलवार ने दान सिंह पर फिल्म न बनाई होती तो हम उन्हें आज चलते-फिरते-गाते हुए कैसे देखते?’
सचमुच, इसी फिल्म की बदौलत जयपुर में दान सिंह को लोगों ने गाते-मुस्कराते, अपने संघर्ष और पीड़ा को बांटते और सुर-ताल के साथ पतंग उड़ाते हुए देखा। अवसर था 18 जून को दान सिंह की पहली पुण्यतिथि का, जिस पर पिंकसिटी प्रेस क्लब में …

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[12 Apr 2011 | One Comment | ]
एक शाम कवि की निगाह में खिल गए रंग

वे दीवानगी की हद तक लिखने-पढ़ने के आशिक हैं। यूं, पेशे से संपादक हैं, पर कभी-कभार दिल कहता है, कहीं दूर चल, तो छुट्टियां लेके कुछ-कुछ जगहों पर वक्त गुज़ारने और लिखने-पढ़ने …अब इसे काम कैसे कहूं…चले जाते हैं। पिछले दिनों वे अहमदाबाद में थे। दोस्तों की पेंटिंग एक्जिबिशन थी, सो दोस्त का होना लाजिमी ही था। ये कोई और नहीं, अपने दुष्यंत ही हैं। बेहतरीन कवि, लेखक, संपादक। जयपुर में रहते हैं, गंगानगर के रहने वाले हैं और दिल कमबख्त काबू में रहता नहीं, सो दूर-दूर टहलता रहता है। …